अज़ीम प्रेमजी की जीवनी-Biography of Azim Premji in Hindi

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Biography of Azim Premji in Hindi-अज़ीम प्रेमजी की जीवनी:

अज़ीम प्रेमजी का पूरा नाम अज़ीम हाशिम प्रेमजी है, भारतीय बिजनसमेन अजीम प्रेमजी इंजिनियर , इन्वेस्टर और विप्रो लिमिटेड के चेयरपर्सन  हैं। अज़ीम प्रेमजी को भारतीय आईटी उद्योग का जार कहा जाता है।

एशियावीक ने  साल 2010 में उन्हें विश्व के 20 सर्वाधिक प्रभावशाली ब्यक्तियों में चुना था । टाइम मैगजीन ने साल 2011 में उन्हें विश्व के 100 सबसे प्रभावशाली ब्यक्तियों में चुना था। उन्हें हमेशा ही विश्व के 500 प्रभावशाली मुस्लिमों में चुना जाता रहा है। साल 2019 में वे भारत के 10 वें  सबसे धनि ब्यक्ति थे।

पकिस्तान के जनक मुहम्मद अली जिन्नाह ने उन्हें पाकिस्तान में रहने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन Azim Premji ने भारत में रहने को चुना।

शुरूआती जीवन और शिक्षा:

अजीम प्रेमजी का जन्म 24 जुलाई 1945 को मुंबई एक शिया मुस्लिम परिवार में हुआ था, इनके पिता एक ख्यातिप्राप्त बिजनसमेन थे , अजीम प्रेमजी ने बीएससी की डिग्री ली हे, उसके पश्चात् स्टेनफोर्ड  विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की है।

Azim Premji के दो बच्चे है रशद प्रेमजी और तारिक प्रेमजी। रशद प्रेमजी विप्रो में चीफ स्ट्रेटजी ऑफिसर ऑफ़ बिजनस आईटी के रूप में काम करतें है। अजीम प्रेमजी की पत्नी का नाम यास्मीन है।

केरियर:

सन 1945 में Azim Premji के पिता मुहम्मद हाशिम ने महाराष्ट्र के जलगाँव डिस्ट्रिक्ट में ‘वेस्टर्न इंडियन वेजिटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड’ की स्थापना की। यह कंपनी “सनफ्लावर वनस्पति” और कपडे धोने के साबुन “787” का निर्माण करती है। सन 1966 में अपने पिता की मृत्यु के पश्चात् 21 साल की उम्र में विप्रो कंपनी का चार्ज संभाला।

विप्रो पहले वनस्पति उत्पाद बनाती थी लेकिन अजीम प्रेमजी ने इसे बेकरी, टायलेट संबंधी, बच्चों संबंधी ,बालों संबंधी उत्पाद बनाने वाली कंपनी में बदला। वर्ष 1980 में IBM के भारत से चले जाने के बाद उन्होने भारत में आईटी की जरूरतों को समझते हुए भारत में आईटी क्षेत्र का विकास करने की ठानी, उन्होंने अपनी कंपनी साबुन बनाने वाली कंपनी को एक अमेरिकी कंपनी की मदद से सॉफ्टवेर बनाने वाली कंपनी में परिवर्तित कर दिया। भारत में 1980 स्थापित विप्रो टेक एक सूचना प्रोद्योगिक सेवा कंपनी है।

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की स्थापना:

वर्ष 2001 में उन्होंने ” Azim Premji Foundation ” की स्थापना की। प्रेमजी ने करीब 8846 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर Azim Premji Foundation को स्थान्तरित किये। इसका मकसद गरीब एवं बेसहारा लोगों की मदद करना है, देश के कई क्षेत्रों में यह राज्य सरकारों के साथ मिलकर क्षेत्र में काम करती है, उनका कहना हे देश के लाखों बच्चे स्कूल नहीं जाते हे, शिक्षा देश को आगे ले जाने का सबसे बढ़िया जरिया है।

वर्ष 2010 में दुनियां के दो सबसे बड़े दिग्गज कारोबारी बिल गेट्स और वारेन वफेट ने ” द गिविंग प्लेज ” अभियान शुरू किया, यह अभियान दुनियां के अमीर लोगों को इस बात के लिए प्रेरित करता है की वे अपनी संम्पति का कुछ हिस्सा परोपकार पर खर्च करे, अजीम इस अभियान में शामिल होने वाले पहले भारतीय बने।

सन 2010 में उन्होंने देश के स्कूली शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए दो अरब डालर का दान दिया, सन 2013 में उन्होंने अपनी दौलत का 25% हिस्सा दान में दिया, प्रेमजी कहतें हे ” ईश्वर ने अगर हमें दौलत दी है तो हमें दूसरो के बारे में अवश्य सोचना चाहिए”। ऐसा करके हम या बेहतर दुनिया बना पाएंगे। उनका कहना हे हम हर बात के लिए सरकार को दोषी ठहरातें हे, इस सोच को बदलना होगा। अगर आप समर्थ है, आपके पास दौलत हे तो समाज के लिए कुछ करिए।

सम्मान:

दुनियां में तेजी से बढ़ रही आईटी क्षेत्र की कंपनी विप्रो के लिए Azim Premji को वर्ष 2000 में, उच्च शिक्षा क्षेत्र में अग्रणी संस्थान मनिपाल अकादमी द्वारा डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2006 में IIT मुंबई द्वारा डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2005 में पद्म भूषण तथा वर्ष 2011 में दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है।

 

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