Power of Positive Thinking – सकारात्मक सोच की शक्ति

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Positive Thinking – (सकारात्मक सोच) क्या है ? 

सकारात्मक सोच या Positive Thinking वह मानसिक और भावनात्मक अवस्था है जिसमें कोई ब्यक्ति किसी घटना या विचार के अपने पक्ष में रहने की सोचता है। पक्ष में न रहने पर वह पीछे नहीं हटता और तब तक कोशिश करता हे जब तक चीजें उसके अनुसार या उसके पक्ष में नहीं हो जाती। 

अर्थात वह हार नहीं मनाता और स्थिति या घटना के अपने पक्ष में होने तक प्रयास करता है। इस स्थिति में ब्यक्ति अच्छी औए सकारात्मक बातों फोकस करता है। वह किसी भी ब्यक्ति की बुरी और नकारात्मक बातों पर ध्यान नहीं देता है।

Positive Thanking वाला ब्यक्ति जीवन के प्रति सकारात्मक और आशावादी रवैया रखता है और हमेशा बेहतर भविष्य के प्रति आशान्वित रहता है।

Positive Thinking – सकारात्मक सोच सफलता के लिए बेहद जरुरी

अब तक तो आप समझ ही गए होंगे Positive Thinking सफलता प्राप्त करने के लिए कितनी जरुरी है। अगर सीधे और सपाट शब्दों में कहा जाये तो बिना Positive Thinking के सफलता संग्दिग्ध है। क्योंकि सफलता प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करना जरुरी रहता है, और प्रयासों में निरंतरता तभी बनी रह सकती जब आपका दृष्टिकोण सकारात्मक हो, नकारात्मक दृष्टिकोण बाधा की तरह हे, जिसे यथा शीघ्र बदलना जरुरी है। सकारात्मक सोच आपके कार्य करने की स्किल , आपकी क्षमता अच्छा प्रभाव डालती है, नकारात्मक सोच आपकी कार्य करने की क्षमता को संकुचित करती है।

Power of Positive Thinking – सकारात्मक सोच की ताकत

इसे समझने के लिए नार्थ केरोलिना यूनिवर्सिटी की रिसर्चर बारबरा फ्रेडरिक्सन ने एक प्रयोग किया, उन्होंने अलग अलग लोगों के 5 ग्रुप बनाये, जहाँ पर उन्हें , उनके इमोशंस को उभारने के लिए अलग अलग तरह  की तस्वीरें दिखायीं गयी,

ग्रुप 1 – हर्ष और उल्लास को दिखाने वाली तस्वीरें दिखाई गयी,

ग्रुप 2 – प्रसन्न संतुष्ट इमोशंस वाली तस्वीरें दिखाई गयी,

ग्रुप 3 – न्यूट्रल टाइप की तस्वीरें दिखाई गयी,

ग्रुप 4- भय और डर को दिखाती तस्वीरें दिखायीं गयी,

ग्रुप 5 – और इस ग्रुप को गुस्सा उभारने वाली तस्वीरे दिखाई गयी,

फिर उन्हें कहा गया कि, सामान स्थिति में अगर वे स्वयं होते तो क्या एक्शन लेते अर्थात क्या करते, इस पर लिखें,

ग्रुप 4 और ग्रुप 5 सबसे सबसे कम एक्शन लिखने वालों में से थे , जबकि ग्रुप 1 औए 2 ने सबसे अधिक एक्शन लिखे थे।

निष्कर्ष यहाँ ये है कि Positive Thinking से Option, संभावनाएं तलाशने के प्रवृति डेवलप हो जाती है।

Positive Thinking-सकारात्मक सोच को बढ़ने के तरीके,

  1. स्वयं पर नियंत्रण रखे : स्वय की आलोचना दूसरों के सामने कभी न करें, स्वयं के प्रति दयालु रहें, अपनी अच्छी आदतों की एक लिस्ट तेयार करें, अपने लिए अच्छा-अच्छा सोचें, स्वयं पर भरोसा रखें।
  2. कभी शिकायत न करें : शिकायत करने या होने से आप Problem से स्वयं को अलग करके, problem के संभावित हल की संभावनाओं को ख़त्म कर देतें है।
  3. प्रतिदिन अपने लिए कुछ वक्त निकले , कुछ मिनट ही सही, Relax करने के उपाय करे,
  4. आपने कुछ काम या टास्क संपन्न किया है, उसके लिए स्वयं को बधाई दें, आप इसकी चर्चा अपने दोस्तों से भी कर सकते है, यह आपके Morale को Boost करने का काम करेगा,
  5. Tension और Nervasnees को दूर करने के उपाय सीखें, नर्वस होने पर Adrinalin का स्राव होता हे, जिससे ब्यक्ति अधिक सजग और चौकस हो जाता है, इस अतिरिक्त उर्जा का प्रयोग सकारात्मक तरीके से दुसरे काम में हो सकता है, 
  6. दृढ निश्चयी बने , अपने Believe पर दूसरों के दवाब में न आयें,

भय, पश्चाताप, क्रोध, ये सभी negitive इमोशन है, ये सभी हमारे शरीर, हमारे दिमाग की क्रियाशीलता को कम कर देतें है, जहाँ तक हो सके इन सबसे बचाना चाहिए, इनमे से किसी को भी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए, किन्तु ये इमोशंस बहुत सिमित मात्रा में हमारे लिए आवश्यक भी है, जैसे अगर किसी को कानून का भय नहीं होगा तो वह कानून का पालन नहीं करेगा, उसी तरह कोई गलती होने पर उसका पश्चाताप एक सीमा के भीतर करना अच्छे ब्यक्ति की निशानी मानी जाती हे, बस ध्यान यह रखना हे कि ये हमारे ऊपर हावी न होने पायें।  

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