What is Finance,फाइनेंस क्या है जानिए हिंदी में

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Finance शब्द  के बारे में हम सभी लोगों ने अपने जीवन में कभी न कभी तो सुना होगा, हिंदी में इसका अर्थ होता है वित्त। साधारण भाषा में कहें तो धन के प्रबंधन या वित्त पोषण को finance कहतें है। कार्य और धन एक दुसरे के पूरक होतें हें अर्थात कार्य करने के लिए धन की आवश्यकता होती है और धन के लिए कार्य  की।

धन , finance का अभिन्न भाग है, किसी भी कार्य, उत्पादन, या सेवा के संचालन के लिए धन अथवा पूंजी की आवश्यकता होती है,  उदहारण के किये यदि कोई उत्पादन यूनिट लगाता है, तो उसे यूनिट के सेटअप, कच्चे माल, कर्मचारियों की सैलरी के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है, इस पूंजी के प्रबंधन को ही Finance कहतें है। इसमें पूंजी की ब्यवस्था स्वयं के इन्वेस्टमेंट अथवा लोन के माध्यम से की जाती है, जिसे कुछ वित्तीय संस्थायें मुहैया कराती है।

Finance को तीन भागों में बांटा गया है,

1.Personal Finance ( ब्यक्तिगत वित्त )

2.Corporate Finance ( निगम वित्त )

3. Public Finance ( लोक वित्त )

उपरोक्त तीनों प्रकारों में ही मूलतः कार्य एक सामान ही है, जैसे कम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त करना, अच्छा और जोखिम रहित निवेश करना, समय पर देनदारियों को निबटाना, बैंकिंग इत्यादि ,  किन्तु कार्य की प्रकृति को देखते हुए इनकी कुछ विभिन्नता भी है, तीनो के बारे में हम एक एक करके जानते है ,

Personal Finance पर्सनल फाइनेंस क्या है ?

पर्सनल फाइनेंस का मतलब ब्यक्तिगत वित्त प्रबंधन। ब्यक्तिगत आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए पूंजी के प्रबंधन और वितरण को पर्सनल finance कहते है। एक ब्यक्ति के जीवन में जो मुख्य जिम्मेदारियां हें , बच्चों की पढाई, उनके शादी -विवाह , स्वयं के रिटायरमेंट के बाद की ब्यवस्था, इमरजेंसी जैसे बीमारी के लिए धन की ब्यवस्था आदि के लिए पूंजी और देनदारियों की ब्यवस्था पर्सनल फाइनेंस के अंतर्गत आता है।

आसान शब्दों में कहें तो ” पर्सनल फाइनेंस ब्यक्ति द्वारा उसके धन के कुशलता पूर्वक नियोजन और खर्चे को कहते है जिसमें वह अपने व अपने परिवार की जरूरतों और सुरक्षा की पूर्ती करता है। “

What is Corporate Finance निगम वित्त क्या है ?

निगम वित्त या कॉरपोरेट फाइनेंस में किसी कंपनी या निगम के संचालन या उसकी पूंजीगत आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए के किये पूंजी के प्रबंधन या वितरण को कॉरपोरेट फाइनेंस कहतें है। कॉरपोरेट फाइनेंस का काम मुख्यतः शेयर धारकों की पूंजी में वृद्धि करना होता है,निगमों के लिए वित्त की ब्यवस्था चाहे वह बांड इशू करके हो या स्टाक जारी करके या फिर बैंक से ऋण लेकर पूंजी का वितरण और प्रबंधन करना हे, संक्षेप में कहे तो पूंजी की ब्यवस्था उसके उचित वितरण और प्रबंधन जिससे निगम को अधिकतम लाभ हो, कॉरपोरेट फाइनेंस कहलाता है।

What is Public Finance लोक वित्त क्या है।

सार्वजनिक क्षेत्रों में होने वाले फाइनेंस को पब्लिक फाइनेंस कहतें है। सार्वजनिक क्षेत्रों में पूंजी के होने वाले निवेश और वितरण इसमें आते है। सरकार इसकी देखरेख करती हे, सरकार अपनी पॉलिसियों या नीतियों के माध्यम से इनकम और खर्चो को इस तरह से बनाती हे जिससे जनसाधारण की आय में असमानता को कम किया जा सके, और इकोनोमी में स्थायित्व आ सके,

पब्लिक फाइनेंस के तीन मुख्य घटक हें,

  1. उपलब्ध आय स्रोतों का कुशलतापूर्वक , उचित तरीकों से एकत्र करना
  2. पब्लिक में समानता पूर्वक वितरण
  3. इकॉनमी में स्थायित्व

इकॉनमी में उचित तरीकों से रिसोर्सेस को एकत्र करना और कुशलतापूर्वक इन रिसोर्सेस का वितरण या उपयोग पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट के अंतर्गत आता हे।

पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट के निम्नलिखित उपविभाग हें,

  1. पब्लिक रेवेन्यु
  2. पब्लिक या सरकारी खर्च
  3. सरकारी देनदारियां
  4. फाइनेंसियल एडमिनिस्ट्रेशन
  5. फेडरल फाइनेंस

 

फाइनेंस विषय काफी ब्यापक और विस्तृत फिर भी हमने इसे बेहद सरल भाषा और संक्षेप में समझाने की कोशिश की हे, आशा करता हूँ की ये आर्टिकल आपको पसंद आया होगा, आगे भी फाइनेंस पर आर्टिकल प्रकाशित करता रहूँगा।

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