Christmas Day ( क्रिसमस डे ) कब और क्यों मनाया जाता है

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दोस्तों भारत त्योहारों का देश है, क्रिसमस डे ( Christmas Day ) यों तो मूल रूप से ईसाईयों तक त्यौहार है लेकिन भारत में  भी क्रिसमस डे को उसी तरह हर्षौल्लास के साथ मनाया जाता है जैसे दिवाली , दशहरा, ईद या फिर गुरु पर्व मनाया जाता है।

क्रिसमस डे (Christmas Day ) को पूरी दुनियां में बड़ी ही डूम धाम के साथ मनाया जाता है, भारत में विशेषकर शहरों में यह त्यौहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता हे, गावों में इसका प्रचलन अभी उतना नहीं है। क्रिसमस डे का आकर्षण (Christmas Day) बच्चों मे खूूब रहता है क्योंकि इस समय उन्हें 3-4 दिनों की छुट्टियां मिलती है। क्रिसमस की सुबह गिरिजाघरों मे मोमबत्तियां जलायी जाती है और विशेष प्रार्थना होती है। घरों की साफ सफाई की जाती है और सजाया जाता है , शाम को केक काट कर खुशी मनायी जाती है।

Christmas Day ( क्रिसमस डे ) कब और क्यों मनाया जाता है

क्रिसमस डे ( Christmas Day ) पूरी दुनियां में 25th दिसम्बर को मनाया जाता है, ईसा मसीह जन्मदिन इसी दिन हुआ था, भारत में इसे बड़े दिन शुरुआत माना जाता है। क्रिसमस डे पर बाजारों की रौनक बढ़ जाती है, इस अवसर पर गिफ्ट और अन्य सामान की खरीददारी की जाती है, क्रिसमस डे पर सेंटा क्लाज सबको गिफ्ट बाटते है, भारत में लोग एक दुसरे को बधाइयाँ देते है।

दोस्तों ऐसी मान्यता है कि 25 दिसम्बर को ईसा मसीह का जन्म हुआ था और उनके मानने वाले इस दिन को त्योहार के रुप मे मनाते है, चौथी शताब्दी से पहले इसे नहीं मनाया जाता था।

ऐसी भी मान्यता है कि प्रभु ईसू का जन्म दिसम्बर मे नहीं अक्टूबर मे हुआ था, गैर ईसाई लोग 25 दिसम्बर को भगवान सूर्य का जन्मदिन मानते है और इस दिन पूजा पाठ करते है। ठंड के लम्बे दिनों के उपरान्त सूर्य इस महीने उष्मा और उर्जा लेकर आता है और गैर ईसाई लोग इस दिन को त्योहार के रूप मे मनाते है। ईसाई धर्म गुरु भी चाहते थे कि प्रभु ईसू का जन्मदिन भी इसी दिन मनाया जाये जिससे कि गैर ईसाई लोगों को भी अपने धर्म की ओर खींच सके। इस दिन को उन्होंने क्रिसमस डे ( Christmas Day ) के रूप मे मनाना शुरू किया।

हमारे देश भारत मे यह त्योहार बडे दिन के रूप मे भी मनाया जाता है।

दोस्तों कुछ परम्पराएं और है जो इस त्यौहार से जुडी हुयी है जैसे कि सांता क्लाज, क्रिसमस ट्री आदि उनके बारे मे भी जानते हैं,

जीसस के बारे मे

जीसस एक महान ब्यक्ति थे, वह समाज मे हमेशा शांति और भाईचारे को बढावा देते थे। उन्होंने समाज को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी, और इसीलिये उन्हे ईश्वर का पुत्र कहा गया। तत्कालीन शासकों को उनका शांति व भाईचारे का संदेश पसंद नहीं आया, और उन्होंने जीसस को सूली पर लटका दिया। ऐसी मान्यता है प्रभु फिर से जीवित हो उठे थे।

सांता क्लाज ( Senta Claus)

सांता क्लाज की कहानी संत निकोलस से जुडी हुयी है , संत निकोलस का जन्म तीसरी सदी मे जीसस की मौत के 280 साल बाद हुआ था, बचपन मे माता पिता के देहांत के बाद निकोलस ने अपना जीवन जीसस को समर्पित कर दिया था, वह पादरी बन गये, उन्हें गरीब बच्चों की मदद करना बहुत पसंद था, वह आधी रात को आकर बच्चों को गिफ्ट दिया करते थे ताकि उन्हें कोई देख न पाये। संत निकोलस की वजह से बच्चे सैंटा क्लाज का इंतज़ार करते हैं।

क्रिसमस ट्री ( Christmas Tree )

कहते है जब प्रभु ईसू का जन्म हुआ था तो उन्हें देखने सभी देवी देवता आये थे जो उन्हें आशीर्वाद और उनके माता पिति को बधाई देने आये थे। उसी समय से सदाबहार फर के पेड को सजाया जाता है उसे सितारों से सजाया जाता है बाद मे इसे तरह तरह की और चीजों से सजाने लगे और इसका नाम दिया क्रिसमस ट्री।

आज क्रिसमस डे ( Christmas Day ) एक ग्लोबल त्योहार बन चुका है अब लगभग पूरी दुनिया मे इसे मनाते है लोग एक दूसरे को गिफ्ट देते हैं, बधाइयां देते है , कार्डों द्वारा भी बधाई दी जाती है, आज क्रिसमस ( Christmas Day)मेलमिलाप का त्योहार बन चुका है।

हम भी चाहते है त्योहारों के माध्यम से मेल मिलाप बढता रहे और दुनिया मे शांति व सौहार्द कायम रहे।

 

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